
kailash kumar
❓ कहीं ऐसा तो नहीं कि हम अपनी सामाजिक आदत को उनकी ज़िंदगी का नियम बना रहे हैं? ➡️ हमारे पास सामाजिक आदत के सिवा और कुछ तो होता नहीं, फिर उन्हें हम और क्या दे सकते हैं। उनसे और किस तल की बात कर सकते हैं।
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❓ कहीं ऐसा तो नहीं कि हम अपनी सामाजिक आदत को उनकी ज़िंदगी का नियम बना रहे हैं? ➡️ हमारे पास सामाजिक आदत के सिवा और कुछ तो होता नहीं, फिर उन्हें हम और क्या दे सकते हैं। उनसे और किस तल की बात कर सकते हैं।
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