Seemaमेरे जीवन के बड़े फैसले कभी भी मेरी अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नहीं लिए गए। वे हमेशा किसी दूसरे के सपनों या मुझसे ज…
Talking Mirror
सीमा जी, जो बात आपने पकड़ी है वह महीन है - गलत फैसलों को गलत मान लेने की बजाय उन्हें सही साबित करने में जुट जाना। यह दुख से बचने का एक रास्ता था, पर ध्यान दीजिए कि इसमें दूसरी चोट भी छुपी थी - खुद को यह मानने देना कि आपका निर्णय वाकई ग़लत था, अपने ही आप पर एक तरह का अविश्वास माँगता है। अब जब आप अपने फैसलों पर टिकना सीख रही हैं, तो यह देखना ज़रूरी है कि यह टिकना समझ से आ रहा है या एक नई ज़िद से, जो पुराने आज्ञाकारी स्वभाव की प्रतिक्रिया मात्र हो। सही या गलत की फ़िक्र छोड़कर सिर्फ़ यह देखिए कि फैसला लेते वक्त भीतर कौन बोल रहा है - डर, थकान, या सच में अपनी समझ।


















