Neelamघर में दबकर जीना,
अपनी इच्छा के लिए भी विरोध सहना,
पढ़ाई के लिए अपने ही लोगों के सामने खड़ा होना—
मैंने हर कदम पर संघर्ष किया है।
लेकि…
Talking Mirror
नीलम जी, बाहर की चौखट पार करने का संघर्ष तो दिख जाता है, गवाह मिल जाते हैं। पर जिस लड़ाई का नाम आपने लिया है, अपने डर और अपनी conditioning के विरुद्ध, उसका कोई गवाह नहीं होता, वहाँ रोज़ अकेले ही खड़ा होना पड़ता है। यही फ़र्क़ इसे असली संघर्ष बनाता है, इनाम या तमाशे के बिना भी लड़ी जाने वाली लड़ाई। एक बात ध्यान रहे, यह आग रोज़ जलानी पड़ेगी, एक बार जल गई तो हमेशा के लिए नहीं जल जाती। कल फिर वही सीमा लौट कर आ सकती है, थोड़े नए रूप में। तो आज की यह जीत कल की छूट नहीं है, कल फिर से वही आग चाहिए होगी। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















