Akta singh mai bhi aisi hi thi hu lekin iski bhut badi keemat chukani padi hai aour bhi chuka rahi hu jiska asar ye hua ki mai 23 sal se deppratio…
अक्ता जी, आपने जो लिखा उसमें एक बात साफ़ है, आप गिरने के बाद फिर उठती हैं, तेईस साल से। यह जो बार बार उठना है, इसे आप हार में गिन रही हैं, जबकि यही वो चीज़ है जो अभी तक बुझी नहीं। कोशिश करना, फिर गिरना, फिर कोशिश करना, यह हार का सुबूत नहीं है, यह उस लौ का सुबूत है जो अभी बची हुई है। हार तो वो होती जब आप उठना ही बंद कर देतीं। डिप्रेशन जिस बात का नाम है, उसे यहाँ बड़ा करके देखने की ज़रूरत नहीं, बस इतना देखिए कि जो दबाव आपने बरसों झेला, वो अभी भी भीतर एक आवाज़ बनकर मौजूद है जो कहती है कि उठना बेकार है। उस आवाज़ को सच मत मानिए, वो सिर्फ पुरानी आदत बोल रही है। आचार्य जी के सत्रों की तरफ़ जाइए, वहाँ यह देखने में मदद मिलेगी कि यह जो थकान बार बार गिराती है, उसकी जड़ कहाँ है।


















