
रजनी नाघरे
मनुष्य के भीतर जो अंहकार होता है और वह अपूर्ण होता है इसीलिए वह अपने आप को विषयों से घेरे रहता है l की कुछ प्राप्त हो सके इसलिए वह युद्ध करता है जानवरों को अहम थोड़ी मात्रा में होता है वे युद्ध नहीं करते हैं
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मनुष्य के भीतर जो अंहकार होता है और वह अपूर्ण होता है इसीलिए वह अपने आप को विषयों से घेरे रहता है l की कुछ प्राप्त हो सके इसलिए वह युद्ध करता है जानवरों को अहम थोड़ी मात्रा में होता है वे युद्ध नहीं करते हैं
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