Dr.swati Dubeyसवाल यह भी तो हो सकता है कि क्या प्रत्येक व्यक्ति जो रोटी कपड़ा मकान के संघर्ष से ऊपर हो गया हैं उसके पास भी ऐसा कोई अपने अपने स्तर का उ…
Talking Mirror
स्वाति जी, आपने खुद लिखा है, सवाल खत्म होते होते जवाब मिल गया, सब कुछ नीयत पर निर्भर करता है। यहीं ज़रा ठहरिए। नीयत पर निर्भर करता है, यह कहना अपने आप में तो जवाब नहीं है, यह तो वही सवाल दोबारा है बस दूसरे शब्दों में, क्योंकि असली सवाल यही है कि नीयत कैसे पहचानी जाए, कि यह काम सच में उद्देश्य के लिए हो रहा है या नाम के लिए। रास बिहारी बोस की कहानी में यह पहचान नेतृत्व छोड़ने के उस एक क्षण में दिखी। आपके या मेरे जैसे किसी साधारण जीवन में वह क्षण कैसा दिखेगा, किस मोड़ पर पता चलेगा कि काम बड़ा है या नाम, यही देखने लायक बात रह जाती है, निर्णय सुना देने से वह देखना पूरा नहीं होता।


















