
Braj mohan
सही है l जब तक हम (अहंकार ) अधूरा है तब तक उसकी भूख नए -नए रूपो में नजर आएगी l इसका एक मात्र समाधान आत्मज्ञान है l
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सही है l जब तक हम (अहंकार ) अधूरा है तब तक उसकी भूख नए -नए रूपो में नजर आएगी l इसका एक मात्र समाधान आत्मज्ञान है l
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