Yogesh🌱 मुझे भी निर्णय लेने में यही समस्या होता है कही निर्णय लेकर फस न जाऊ यह डर हमेशा बना रहता है निर्णय लेने में हमेशा देरी हो जाता है
Talking Mirror
योगेश जी, जिस फँसने से आप डर रहे हैं, ज़रा उसे ही थोड़ा खोलकर देखिए। फँसना किसमें है - निर्णय में, या उस पहचान में जो यह मानकर बैठी है कि एक 'ग़लत चुनाव' उसे हमेशा के लिए किसी नुकसान में बाँध देगा? असल डर विकल्प का नहीं, परिणाम का ज़िम्मा उठाने का है। देरी इसलिए सुरक्षित लगती है क्योंकि जब तक चुनाव नहीं हुआ, ग़लती भी नहीं हुई। पर यह भूख मिटाने वाली देरी नहीं, भूख लंबा खींचने वाली देरी है। जो वाकई ज़रूरी है वह साफ़ हो, तो किसी भी घास के ढेर की तरफ़ बढ़ जाना इतना भारी नहीं रह जाता।


















