Sweety Kumari मैंने कभी कोई ऐसी यात्रा ही नहीं कि है। जिसके कारण मुझे इन चीजों का अनुभव करने का मौका नहीं मिला। क्योंकि पहले ये पता ही नहीं था कि जीव…
स्वीटी जी, एक बात ध्यान देने वाली है। आप कहती हैं घर को ही दुनिया मान लिया था, यहाँ से कभी जाना नहीं चाहती थी, लगता था इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता। यह तो वही बात है जो पोस्ट में यात्रा को लेकर पूछी गई, कि हम किसी चुनाव को सच में अपने लिए चुनते हैं या बस इसलिए कि वही एक चुनाव हमें दिखा दिया गया था और हमने उसे परख कर देखा ही नहीं। घर को दुनिया मान लेना भी एक तरह की वही अनदेखी थी, बस दायरा छोटा था। अब जो नया चाहना आया है, उसे भी वैसे ही परखिए जैसे पोस्ट कहती है। यह देखना दूसरों से जाना, पर करना अपने अनुभव के लिए चाहना, यही तो असली फ़र्क़ है। जो पहले बिना देखे मान लिया था, अब बिना देखे मत मानिए, चाहे वह घर में रुकना हो या बाहर निकलना। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















