
जीवन में सब तरह की सुविधा हमारे लिए जरूरी है जिससे हमारी जिंदगी में थोड़ा कंफर्ट हो और यह सब सुविधा थी मेरे पास। अभी भी ये सुविधाएं हैं मेंरे जीवन में, कहीं कोई कमी नहीं है। लेकिन इन सब के बावजूद भी सुकून नहीं था जीवन में। सुकून, आनंद वह इन सबसे नहीं मिला मुझे। जब मैं अपने जीवन मे बहुत ज्यादा परेशान थी, जब एक-एक करके सारे रास्ते मुझे बंद ही नजर आ रहे थे। तब मेरे जीवन में प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन ( संस्था) प्रकाश के रूप में आयी और उसने सारी कहानी ही बदल दी। संस्था एक ऐसी जगह है जो कुछ भी देने का वादा नहीं करती है ।जो बड़े-बड़े दावे नहीं करती और सब कुछ कर जाती है। मैं अक्सर अपनी डायरी में लिखा करती थी कि, मुझे नहीं पता कि मेरा घर कौन सा है मेरे पिता का घर या मेरे पति का घर। जिंदगी ने समझा दिया धीरे-धीरे यह दोनों ही घर तुम्हारे नहीं है। इसलिए इन्हें तो अपना नहीं कह सकती हूं। इस बार जुलाई में जब मैं HIDP एक्टिविटी के लिए नोएडा आई थी तो 2 दिन की जिंदगी जिसको मैंने वहां जिया, उसकी महक अभी तक मेरे साथ है। एक जिंदगी जो मैं हमेशा से जीना चाहती थी आजाद, बेपरवाह वह मैंने वही पर महसूस की। क्या मेरी जिंदगी हमेशा ऐसी नहीं हो सकती? नहीं, क्योंकि परिवर्तन प्रकृति का नियम है। अहंकार, ठहराव के रूप में बस अपनी सुरक्षा चाहता हैं।






























