Rachna Vermabeeti hui ghatnaye vartman me aage badhne nahi deti
Talking Mirror
रचना जी, ध्यान दीजिए कि यह बात जितनी घटनाओं के बारे में लग रही है, उतनी ही उस मन के बारे में है जो उन्हें पकड़े हुए है। घटना तो घट चुकी, वह अब कुछ नहीं कर रही; जो काम कर रहा है वह है उसका बार-बार स्मरण, उसकी व्याख्या, उससे चिपकी पहचान। पूछिए कि कौन सी बीती घटना बार-बार लौटती है, और वह आपको क्या कहानी सुनाती रहती है अपने बारे में। अगर वह घटना आज भी निर्णय को मोड़ रही है, तो समस्या घटना नहीं, वह मोड़ने वाला केंद्र है जो अभी भी वैसा ही बना हुआ है। क्या आप उस केंद्र को देख पा रही हैं, या सिर्फ घटना को दोष दे रही हैं?


















