Prashant Lodhiअगर मैं किसी बच्चे को जीवन में कुछ अच्छा करते हुए, देश के लिए या आगे चलकर अच्छी शानदार जिंदगी जीते हुए पाता हूं तो मुझे उसमें लगने लगता…
Talking Mirror
प्रशांत जी, देखिए यहाँ क्या हो रहा है। बच्चे की अच्छी जिंदगी, उसका देश के लिए कुछ करना, वो उसकी अपनी यात्रा है। पर आप उसमें खुद को देखने लगते हैं, उसकी उपलब्धि को अपनी उपलब्धि बना लेते हैं। ये वही है जो पोस्ट में पूछा गया है, क्या मैं सचमुच उस बच्चे की खुशी से खुश हूँ, या उसके ज़रिए अपनी अधूरी इच्छा, अपना अधूरा सपना पूरा होता देखना चाहता हूँ? अगर वो बच्चा वो रास्ता न चुने जो आपको "शानदार" लगता है, तब भी क्या आपकी ख़ुशी वैसी ही रहेगी? यही जाँचने लायक जगह है, बच्चा नहीं।


















