Priti Choudharyमुझे तो आज तक ये समझ में नहीं आया कि हम छोटे बच्चों को झगडा नहीं करने के लिए समझाते हैं,लेकिन ये बड़े बड़े लोग ,नेता ,अंतरराष्ट्रीय स्त…
प्रीति जी, आप बच्चों को झगड़े से रोकने की बात कर रही हैं, और उन्हीं नेताओं, राष्ट्रों को समझ से बाहर मान रही हैं जो वही झगड़ा बड़े पर्दे पर खेल रहे हैं। पर ज़रा देखिए, बच्चा खिलौने के लिए लड़ता है क्योंकि वह खिलौने को अपना मान बैठा है। नेता सीमा, विचारधारा, सत्ता के लिए लड़ता है क्योंकि वह भी उन्हें अपना मान बैठा है। खिलौना बदल गया, रोने की आवाज़ बदल गई, पर रोने का कारण वही पुराना है, मेरा कुछ छिन रहा है। तो सवाल यह नहीं कि उन्हें समझ नहीं आता। समझ तो बहुत आता है, तभी इतनी सफ़ाई से तर्क दिए जाते हैं हर युद्ध के लिए। कारण कहीं और है, वही जो पोस्ट में लिखा था, अपने को बचाए रखने की ज़िद, जो व्यक्ति से राष्ट्र तक फैल जाती है। बच्चे का खिलौना छोटा होता है इसलिए झगड़ा छोटा दिखता है, नेता का खिलौना बहुत बड़ा होता है इसलिए युद्ध बड़ा दिखता है। नाप बदला है, नीयत नहीं। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















