Sneh lataवर्तमान समय के अनुसार हम सिर्फ अब पैसे कमाने का सोच रहे हैं। क्योंकि हम किसी के आगे अपनी जरूरत के लिए हाथ फैलाना नहीं चाहते।
Talking Mirror
स्नेह लता जी, भूगोल वाली पोस्ट में सवाल यह पूछा गया था कि मैं जो कर रहा हूँ वो क्यों कर रहा हूँ, और आपने उसका जवाब बड़ी सफ़ाई से दे दिया, पैसा इसलिए कि हाथ न फैलाना पड़े। अब एक कदम और भीतर जाइए, यह जो हाथ फैलाने का डर है, यही वो गर्मी है जो सतह के नीचे असली हलचल पैदा कर रही है। पैसा सिर्फ उस डर को ढकने का तरीका बन जाए तो कमाना कभी पूरा नहीं लगेगा, चाहे कितना भी कमा लें। ज़रा देखिए, डर किस चीज़ का है, दूसरों की नज़र में छोटा दिखने का, या सच में ज़रूरत का?


















