
Abhishek jha
ये बिल्कुल अभी मेरे वार्ड की स्थिति से मेल खाता है।पिछले पांच वर्ष जो नगर परिषद रहा उसने पूरे वार्ड को चमन कर दिया। वो बिल्कुल धरातली आदमी था। उसे किसी भी तरह के बड़े सम्मान और दिखावे की जरूरत नहीं थी। वो बस साइकिल उठाता और पूरे नगर में घूमता। खुद से चीजों को देखता और उस हिसाब से काम करता। अगर हमें कुछ काम करवाना है तो उसे बता दो वो लिख के ले जाता है और काम करवा देता। इस बार भी उसके जीतने के पूरी उम्मीद थी। पर ऐसा नहीं हुआ कोई और ही दबंग और दिखावटी जीत गया। जिसे बहुत से लोग तो सही से जानते भी नहीं। सुनने में आया कि उसने चुनाव से पहले बहुत सी चीजें जनता में बांटी। लगता है ईमानदारी की जगह लालच और दिखवा जीत गया। हम जैसे होते हैं वैसे ही हमारे चुनाव होते हैं।🥺


















