
Sneha Patel
मैं जिसे सही मानती हूं उनमें डूबती जाती हूं और एक दिन जब पता चलता हैं कि गलत है तो दुःख हो जाता है और उसमें से फिर निकलने में भी समय गंवाती हूं, क्योंकि मुझे ये आशा रहती है कि हो सकता है सही हो, पीछे देखते देखते उसमें से बाहर निकलती हूं।
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मैं जिसे सही मानती हूं उनमें डूबती जाती हूं और एक दिन जब पता चलता हैं कि गलत है तो दुःख हो जाता है और उसमें से फिर निकलने में भी समय गंवाती हूं, क्योंकि मुझे ये आशा रहती है कि हो सकता है सही हो, पीछे देखते देखते उसमें से बाहर निकलती हूं।
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