
इसी तरह पहले हम भी मानते थे मंगलवार को नाखून, बाल नहीं काटना चाहिए और किसी दिन काट लो। घर में भी ऐसे ही माहौल था। कभी हमने पूछा भी तो उन्होंने बोला बस नहीं काटना चाहिए और बहस मत करो। कभी भी हमने जाँचा ही नहीं की क्यों नहीं काटना चाहिए। जबकि बस ये अहंकार की ये चाल है कि हमारे पुर्वज मानते आ रहे हैं तो हम भी मानेंगे क्योंकि अहंकार बस डरा हुआ रहता है कि कही कोई अशुभ न हो जाए और जब संयोग से कभी कुछ अशुभ हो जाए तो कहे देखो मैने कहा था कि नहीं काटना चाहिए। और अहंकार कभी भी किसी भी बात को जाँचना नहीं चाहता है क्योंकि अगर वो जांचेगा तो उसकी मान्यता टूटेगी , और जांचने में मेहनत भी लगता है तो अहंकार चाहता है कि कौन इतना मेहनत करे जाँचने में चलो बस ये बात मान लेते हैं कोई मेहनत भी नहीं करना पड़ेगा और कोई डर भी नहीं लगेगा।।


















