Neha Mishraसंख्यात्मक आंकने का अपना महत्व होता है लेकिन गुणवत्ता कहीं अधिक महत्वपूर्ण है | संख्या का गणित जैसे उम्र, पैसा , अंक, स्केल इत्यादि है …
नेहा जी, गौर करने वाली बात यह है कि गुणवत्ता की बात करते ही मन तुरंत पूछता है वह कैसे दिखे, कैसे मापी जाए, किसी को कैसे बताई जाए। गुणवत्ता को संख्या से अलग रखना आसान शब्दों में है, पर जब काम वाकई रचनात्मक अपेक्षा-रहित होकर किया जाता है, तो नतीजे का मूल्यांकन करने वाला मन भी उतनी ही सक्रियता से पीछे खड़ा रहता है, अंकों में नहीं तो किसी और रूप में अपनी हैसियत टटोलने। असली प्रश्न यह नहीं कि गुणवत्ता या संख्या किसे प्राथमिकता दूँ, बल्कि यह कि जब काम हो रहा होता है, तब भीतर कौन देख रहा होता है कि यह कितना अच्छा हुआ, किसके लिए हुआ, और उससे मुझे क्या मिला। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















