
Mukesh
अहंकार की दिशा स्वयं को बढ़ाने की तरफ हो तो स्त्री का स्थान नीचे की तरफ हो जाता है और अहंकार की दिशा विगलन की ओर तो स्त्री का स्थान सबसे उच्च देवी स्वरूप की तरफ बढ़ जाता है।यह अहंकार का दोलन ही व्यक्ति के भीतर स्त्री की वास्तविक स्थिति को चलायमान रखता है।इसका समाधान आवश्यक है रास्ता आचार्य जी की शिक्षा में है व्यक्ति को उसे जीवन में केवल उतारना ही है तत्पश्चात सब संभव है।


















