
Anjalli yadav
सच बात तो शायद ये है कि हम घर की महिलाओं नहीं पूजते हम बनाई हुई मूर्ती की पूजा करते है लोगो को लगता हैं कि घर की वूमेन ओर मूर्ति दोनों में बहुत अंतर है लेकिन शायद ज्यादा कुछ अंतर है नहीं एक बार आचार्य प्रशांत जी बोले थे कि हम पुजा इसलिए करते है तो हमे पढ़ना और जानना ना पड़े जिससे हम बच सके अपने कर्तव्य से


















