ANITA KANWAR1️⃣ आचार्य जी से जुड़ने से पहले आप 'जीवनमुक्ति' से जुड़ी किन मान्यताओं का समर्थन करते थे? और आपके आस-पास तथा सोशल मीडिया पर इनसे जुड़ी …
अनीता जी, आपने एक बहुत साफ़ बात रख दी है — जब अहंकार को अपनी ही इच्छाओं के लिए एक धार्मिक स्वीकृति मिल जाए, तो वह ख़ुद को चुनौती देने की ज़हमत क्यों उठाएगा। यही देखना असली काम है। अब इसे अपने ऊपर भी उतनी ही ईमानदारी से लगाइए: धनिया नाम जापना पढ़ाई से बचने का रास्ता था, यह आपने साफ़ देख लिया — पर आज वो कौन-सी जगहें हैं जहाँ आप अब भी कोई भावुक या आध्यात्मिक-सा लगने वाला बहाना ओढ़कर किसी ज़रूरी मेहनत या फ़ैसले से बच रही हैं? मुक्ति की सही समझ तभी काम आती है जब वो आज के किसी टालमटोल को पकड़े, सिर्फ़ पुरानी स्मृति-कर्मकांड की आलोचना बनकर न रह जाए। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















