Ravindra Singhगुस्से में मैं सब कुछ भूल कर झगड़ने में लग जाता हूँ। और कुछ देर बाद मैं पाता हूँ कि मैं रुककर उस झगड़े को रोक सकता था या ठीक उसी समय दे…
Talking Mirror
रवीन्द्र जी, जो देखा है उसे ध्यान से देखिए। गुस्सा आने पर सब भूल जाना एक बात है, पर कुछ देर बाद यह याद आ जाना कि रुककर रोक सकता था - यह याद खुद बता रही है कि उस पल कोई असमर्थता नहीं थी, बल्कि झगड़े में बह जाना आपको कुछ दे रहा था, शायद खुद को सही साबित करने की या जीतने की तसल्ली। अगली बार गुस्सा उठते ही यह मत पूछिए कि मैं कैसे रुकूँ, यह पूछिए कि इस झगड़े से मुझे चाहिए क्या है। वह सवाल जवाब से पहले ही आधा काम कर देता है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















