
आचार्य जी इस सम्मान के हकदार हैं । वह डिजर्व करते हैं अपने काम के लिए यह सम्मान। हम गीता प्रतिभागी है हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम भी सिर्फ उनको सुनते ना रह जाए, दूसरों को उनका सम्मान करते देखते ना रह जाए । उनके साथ खड़े होकर उनके साथ दे मिशन में शायद यही आचार्य जी के लिए हमारा प्रेम होगा । जो वह प्रेम हमसे करते हैं अगर हम बदले में मिशन के साथ ईमानदारी से नहीं खड़े हो पाए तो बस हम आचार्य जी को दूर से लोगों को ऐसे ही उनका सम्मान करते देखते रह जाएंगे । कुछ लोग जो आचार्य जी को वास्तव में समझते हैं उनकी वैल्यू करते हैं हम बस बैठ-बैठ कर देखते रह जाएंगे और खुश होते रह जाएंगे। इससे मिशन की कोई सहायता नहीं होगी। हमको भी इमानदारी से आगे होना होगा । आचार्य जी के प्रेम के प्रति अगर सम्मान है तो।


















