
Sonam
हम स्वयं और प्रकृति दोनों को नुक़सान पहुंचा रहे हैं लगातार अधिक उपभोग करके ;हमें जिस चीज की इच्छा होती है हम उसी को पाने में लग जाते हैं क्योंकि हमें आत्म ज्ञान तो पता ही नहीं होता है कि हम समझ सके कि क्या हम सबके लिए सही है और क्या ग़लत है अगर हमें आत्म बोध हो भी जाये तो भी जानबूझकर हम वहीं गलती दोहराते रहते हैं क्योंकि हमारा अंहकार इतना बढ़ चुका होता है कि वह सब कुछ सच जानते हुए भी मानने को ही तैयार नहीं होता है


















