
Vimla Patel
हम इसे इतनी आसानी से स्वीकार कर लेते है कि हा मै ऐसा ही हु, मैं मज़बूर हु वगैरह वगैरह । हालांकि इसके दो पहलू हो सकते है 1 एक पहलू यह कि हम प्रयास करना ही नहीं चाहते तो बस खुद को और दूसरों को बहलाने के लिए बोल देते है कि मैं ऐसा ही हु , मैं मज़बूर हु । दूसरा यह कि हमारे अंदर आत्मविश्वास की कमी होने की वजह से हम हमारे डर को खुद पर हावी कर देते है और उन्हीं परिस्थितियों में जीवन निकाल देते हैं और यह डर हमें हमारी फैमिली और समाज का होता हैं, उनके विचारों और सोच का क्योंकि हमारे खुद के विचार और निर्णय कभी भी पूर्ण रूप से हमारे स्वयं के नहीं होते है वो इसी समाज और दूसरे लोगों के विचारों से प्रभावित होते है ।


















