
NITU KUMARI
क्योंकि ग़ुलाम तो महिलाएँ ही हैं,मालिक की बातों को मानना ग़ुलाम का फ़र्ज़ होता हैं ।क्योंकि ग़ुलाम की तो अपनी सत्ता होती ही नहीं है ।बस वो मालिक के इशारे पर काम करता है ।
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क्योंकि ग़ुलाम तो महिलाएँ ही हैं,मालिक की बातों को मानना ग़ुलाम का फ़र्ज़ होता हैं ।क्योंकि ग़ुलाम की तो अपनी सत्ता होती ही नहीं है ।बस वो मालिक के इशारे पर काम करता है ।
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