
1. AP फ्रेमवर्क चेतना को कैसे परिभाषित करता है? अपने शब्दों में लिखिए। AP framework चेतना द्वैतवादी है बिना द्वैत के चेतना नहीं हो सकती यह दृष्टा है जो अनुभव करता हैं विचार, भावनाएं, स्मृति और इच्छा चेतना की सामग्री है खुद चेतना नहीं 2. तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience) चेतना को कैसे परिभाषित करता है और ये AP फ्रेमवर्क से कैसे अलग है? विज्ञान में चेतना को ऑब्जेक्ट की तरह देखते हैं पर Ap फ्रेमवर्क चेतना को यानि मैं को सब्जेक्ट की तरह देखते है 3. आचार्य जी के अनुसार स्वतंत्र इच्छा (Free Will) क्या है? अपने जीवन से कुछ उदाहरण दीजिए जहाँ आपको लगता आप स्वतंत्र इच्छा का पालन करते हैं, क्या वाकई स्वंतंत्र होतीं हैं। मै गुस्सा हु मैं सफ़ल हुं जैसे अभी मुझे लगता हैं मैं अपने फैसले खुद ले रही हूं पर जब गुस्सा आता हैं या रोना आता हैं तब मुझे लगता हैं मैने किया पर ये स्वतंत्र नहीं है क्यूंकि कोई भी आकर आपको हिला कर चला जाए शब्दों से ही तो ये गुलामी की निशानी हैं स्वतंत्रता की नहीं 4. कल के बोध प्रत्युषा सत्र में आचार्य जी ने कहा कि अहंकार भी नहीं, बल्कि ‘दुख’ मौलिक होता है। आप इससे क्या समझे? संक्षिप्त में लिखिए। दुख पहले होता हैं जब भी कुछ चाहिए होता हैं उदाहरण के लिए दूसरों से सम्मान और ना मिले तो दुख होता हैं अहंकार खुद को बचाने के लिए दोष दूसरों पर डाल देता हैं खुद को देखना ही मुक्ति की तरफ ले जाएगा अपने दुख को देखने से ही हम अपने दुख से मुक्त हो सकते हैं






























