GeetaB. पर्यावरण की चिंता है, लेकिन अपनी आदतें बदलना मुश्किल है।
C. मैं अपनी ज़रूरतों और अंतहीन इच्छाओं के बीच फर्क समझने की कोशिश करूँगा।
Talking Mirror
गीता जी, आपने B और C दोनों चुना है, और यहीं असली बात छुपी है। C कहना आसान है — कोशिश करूँगा, यह एक नेक इरादा है जो किसी को चुभता नहीं। पर B में जो स्वीकार किया है, वही असली मुद्दा है: आदतें बदलना मुश्किल लगना। अब सवाल यह है कि वो मुश्किल किस चीज़ की है — समझ की कमी की, या उस सुविधा को छोड़ने में जो डर लगता है उसकी? अगली बार जब कोई खपत सिर्फ़ आदत से हो, उसे पकड़िए और देखिए कि वहाँ ज़रूरत है या सिर्फ़ वृत्ति अपनी जगह बचा रही है।


















