
Q 1) जिस व्यवस्था की शिकायत मैं आज कर रहा हूं, उसमें मेरे अपने चुनाव की कितनी भूमिका है? उत्तर:— भूमिका में, सिर्फ़ मैं देखा देखी से और भीड़ से प्रभावित होकर उठती व्यवस्था की गड़बड़ी को बाहर ठहराता हूँ, ऐसा करके फ़िर ख़ुद पर से संदेह हटाकर बाहर को कमी बता सकूं, जिससे मैं अपने चुनाव को चुन कर दोष बाहर कही, उस नेता को, बाबा जी को और उपभोगवादी को ठहरा दूं, इन्होंने ही सभी गड़बड़ियां करी है, शिकायत की कमी को बाहर करार दूं। Q 2) क्या मैंने सिर्फ उम्मीदवार चुना है, या अपनी पहचान, डर और लालच को भी वोट दिया है? उत्तर:— हां, मैंने उम्मीदवार कम, डर, लालच और भीड़ के प्रभाव में ज्यादा प्रभावित होकर चुना है, क्योंकि भीड़ में ख़ुद को नहीं देखना पड़ता है, मुझे अपने निर्णय को और चुनावों को।


















