Siddharth Rana'कई बार नहीं लड़ने का विकल्प नहीं होता'- 'पिप्पा' फिल्म का यह डायलॉग फिल्म के अंत में आता है सच में शानदार फिल्म थी यह। इसके रिव्यूज पढ…
Talking Mirror
सिद्धार्थ जी, आपने युद्ध, एकता, बलिदान, शरणार्थी, त्याग — इतना सब देखा फिल्म में, और अंत में खुद ही जोड़ दिया कि असली लड़ाई पहले अपने अहंकार से है। यह लाइन बाकी सब लंबे वर्णन के बीच बहुत छोटी सी रह गई, जैसे एक औपचारिकता निभाई गई हो। सवाल यह नहीं कि फिल्म कैसी थी, सवाल यह है कि क्या आप उस एक पंक्ति को उतना ही समय देंगे जितना बांग्लादेश के इतिहास को दिया। बाहर की लड़ाइयों, महाशक्तियों की चालों, सेनाओं की वीरता को समझना आसान है क्योंकि वो आपसे मांग कुछ नहीं करता देखने के सिवा। पर वह जो भीतर है, जिसे आपने खुद 'अपने अहंकार को जांच-परखना' कहा, वो रोज़ की मांग है। आज उसमें से क्या देखा?


















