
लड़का और लड़की के कपड़े जबरदस्ती अलग कर दी गई है। लड़कियों को सिर्फ घर के ही काम करने तक सीमित करना ये भी जबरदस्ती और बार एक ही बात बोला जाता है ज्यादा बाहर के काम में टांग मत आरओ और ऐसा बोलके संस्कारित किया जाता है। खाना खाने में भी जबरदस्ती अलग किया गया है स्त्री को , घर के पुरुष को खिलाने के बाद ही स्त्री खा सकती है और मैं अपने दादी में रोज देखती हूं । घर में लड़कियों को शॉर्ट कपड़े नहीं पहनने देता है ये कहकर कि लड़की बिगड़ गई। और मैं देखती हूं इस बात को मेरे मां ,दादी , चाची आत्मसाथ कर चुकी है और घर बेटी बोल भी दे कि हम छोटा कपड़े पहनेंगे तो उसके ऊपर चढ़ बैठता है। लड़को को अपना करियर बनाने के पैसा देता है गार्जन और लड़कियों के दहेज के लिए रखता है रुपया और इसे मैं अपने घर में अपने ही प्रति देख रही हूं । लड़को को घर से बाहर पढ़ने भेज दिया जाता है और लड़कियों को यह कहकर बहला दिया जाता कि तुम बाहर कैसे रहोगी लड़कियों सुरक्षित नहीं है और उसके दहेज के लिए रुपया जोड़कर रखता है। लड़कियों को पैदा ही नहीं होने दिया जाता है यह कहकर कि लड़कियों को पैदा करना हानि ही है इसको मैं अपने ही घर में हम चार बहन पहले से होने के कारण और दूसरे लड़के के पैदा करने के लिए गर्भ में ही मेरी मां और पिता ने दो लड़की को मार दिया ।


















