
Pinki kumari
अपने स्वार्थ के लिए बार-बार झूठ बोल देने से जो आंतरिक चेतन आवाज है वह कहीं ना कहीं धीरे-धीरे कम हो जाएगी और जिसे हम चाह कर भी नहीं सुन पाएंगे तो ऑप्शन सी सही होगा हम अपने चुनाव को मजबूरी या स्वभाव का नाम दे देंगे और खुद को जचने से बच जाएंगे जो की बिल्कुल भी ठीक नहीं होगा


















