
👀🪞जहां पर कुपोषण है वो तो एक गंभीर समस्या है, क्योंकि वह इतने गरीब है कि भोजन भी नहीं खा पाते दो वक्त का।और कहीं पर जहां मोटापा है वहां दो भेद है एक तो वह लोग जिन्हें पोषण पौष्टिकता नहीं मिलती वो carbs और fats ज्यादा खाते हैं जैसे कि अधिकतर मध्यम वर्गीय परिवार और महिलाएं। और एक एक मोटापा वह भी है साधनों का दुरुपयोग बहुत ज्यादा है इसीलिए जंगल से आई खाने की भूख अब भी जारी है। अहम, मेरी वृत्तियों में बैठी अपूर्णता, बेचैनी...... थोड़ी देर की खुशी मिल जाती है भांति भांति के मिष्ठान और व्यंजनों को खाने से। मेरे साथ और मेरे आसपास ऐसा ही है कि लोग अपना पेट भरने को ही खाना मानते हैं तो उसमें अधिकतर यही है आलू,दाल,चावल, गेहूं के आटे और मैदे से बने व्यंजन, चीनी से बने व्यंजन आदि। जब भी भूख लगती है इन्हीं को का खाकर अपनी भूख मिटाई जाती है इसीलिए जिस चीज की शरीर में कमी है उसकी पूर्ति तो मिलती नहीं और जो उपलब्ध है उसकी शरीर में अधिकता हो जाती है और मोटापा आ जाता है।🤦🥺


















