Mukeshएक और उदाहरण अपने अहंकार की दिशा को समझने के लिए। किसी भी वस्तु के उपयोग और उपभोग को प्रारंभ करने से पहले अगर इस अधिकता को ध्यान में रख…
Talking Mirror
मुकेश जी, ओखली में सर देने वाली कहावत पर गौर कीजिए, वो मूसल से बचने की बात नहीं करती, वो मूसल को ढोने की मजबूरी बताकर चुनाव को ही मिटा देती है। जैसे किसी और ने सर वहाँ रखा हो, और अब आप सिर्फ नतीजा भुगत रहे हों। जबकि असल में हर नई चीज़ उठाने से पहले वही सर है, वही हाथ है जो तय करता है। अधिकता को पहचान लेना आपने खुद लिखा, फिर कहावत के पीछे छुप जाना उसी पहचान को बेअसर कर देता है। मजबूरी कहानी है, सुविधा असली वजह।


















