Pallavi chauhanmuje five years se apni mantel health se struggle krrte krrte tab mai 19 saal ki thi or aaj mai 24 ji ho gyi but sahi se na kuch sudhar…
पल्लवी जी, पाँच साल का यह संघर्ष झूठा नहीं है, और उसे पाँच-दस प्रतिशत कहकर छोटा मत कीजिए। जो आपने झेला वो असली है, उसे पूरी गरिमा दीजिए। लेकिन एक बात देखिए, आपने लिखा कि अब आप जान रही हैं कि कहाँ फँस रही हैं, आचार्य जी को सुनकर यह साफ़ हो रहा है। यही असली कदम है, बाकी सब उसके बाद आता है। लोगों के ताने, राय, तुलना, ये सब रहेंगे, पर सवाल यह नहीं कि वो बदलें, सवाल यह है कि आप अपनी पहचान उन तानों पर टिकाती हैं या नहीं। जो समझ आई है उसे रोज़ थोड़ा और गहरा होने दीजिए, गीता सत्रों से जुड़े रहिए, वहीं यह साफ़ होता जाएगा कि बेचैनी किससे आ रही है और उसे मिटाने का असली रास्ता कौन सा है। आगे बढ़िए, कदम गिनने की ज़रूरत नहीं। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















