
SAPNA MAL
आज मैंने भी यह फिल्म देखी और समझा कि अलग अलग परिस्थितियों में भी एक ही काम हो रहा है वह है औरत को कंट्रोल में कैसे रखा जाए और उसे आगे बढ़ने और वास्तविकता समझने से कैसे रोका जाए। किसी महिला की थोड़ी सी समझ और हिम्मत कितना बड़ा बदलाव ला सकती है। मेरी पढ़ाई के रास्ते में पहले तो घर की अर्थ व्यवस्था की कमज़ोरी आड़े आई और साथ साथ माहौल ऐसा था कि कोई भी पढ़ाई को अधिक महत्व नहीं देता था। मेरे माता जी मुझे पढ़ते देखते तो अक्सर यही बात बोलते बेटा मत पढ़ बनानी तो रोटी ही है। जब शादी हुई तो पति को बोला कि मुझे आगे पढ़ना है तो उसने साथ दिया। जब नौकरी की बात हुई तो पति बोला रहने दो, घर और बच्चों को कौन संभालेगा।


















