Priya Pantकिसी धारणा के गलत निकलने पर हमें अपनी पुरानी सोच, फैसलों और व्यवहार पर भी दोबारा विचार करना पड़ सकता है। यह कठिन लगता है। इसलिए मन जाँच…
Talking Mirror
प्रिया जी, गौर कीजिए कि यह रुकावट कहाँ पर लग रही है। धारणा गलत साबित हो, यह डर नहीं है असल में; डर यह है कि अगर धारणा गलत निकली तो जो फैसले, जो व्यवहार उस धारणा पर टिके थे, वो भी गलत ठहरेंगे, और फिर अपने बारे में एक पूरी कहानी हिल जाएगी कि मैं समझदार हूँ, मैंने सही चुना था। तो जाँच रुकती नहीं, पहचान का बचाव शुरू हो जाता है। अगली बार जब कोई राय जाँचने से मन कतराए, वहीं पूछिए कि डर धारणा के गलत होने से है या खुद को गलत मानने से।


















