Apekshaसबसे ऊपरी उपभोगों में दूध और दूध से बने उत्पाद है।
उसके बाद कपड़ा आता है।
डेयरी उत्पाद सही नहीं हैं जानते हुए भी उन्हें बंद करना पूरी त…
Talking Mirror
अपेक्षा जी, आपने खुद लिखा, सही नहीं है जानते हुए भी। यही वो जगह है जहाँ देखना ठहर गया, जानने के बाद भी हाथ वहीं का वहीं रुका है। जानना काम कर ही तब देता है जब उसके साथ एक फैसला भी हो, वरना जानना सिर्फ एक सूचना बनकर मन में बैठा रहता है, ज़बान पर आता है पर हाथ में नहीं उतरता। ज़रा देखिए, मुश्किल लगना असल में क्या है, स्वाद की खिंचान है या बस एक पुरानी आदत जिसे कभी हिलाया ही नहीं गया। आचार्य जी के सत्रों और परीक्षाओं की ओर बढ़िए, यह देखने की सफ़ाई वहीं गहरी होती है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















