
मैंने अपनी कल्पना को परखा है मेरा मन जो भी कल्पना कर रहा होता है वह मैंने जाना है कि झूठ ही होती है जैसा मैंने सोचा होता है वैसा कभी होता ही नहीं जैसा कि अभी कुछ घंटा पहले की बात है मेरे पास मेरे पिताजी का फोन आया उन्होंने मुझसे बोला क्या हुआ आ नहीं रहे आज बहुत लेट हो गए तो मैने कहा थोड़ी देर में आ रहा हूं तो मेरे मन में विचार आने लगे और मैं निरंतर अपने विचारों की कल्पना को देख रहा था तो कभी मन में ख्याल आ रहा था कहीं कोई बात तो नहीं हो गई पिताजी मुझे बता नहीं रहे हैं कहीं बड़े भाई ने कोई गलत कदम तो नहीं उठा लिया क्योंकि उनको लेकर मैं ज्यादा सोचता रहता हूं क्योंकि वह परेशानी की स्थिति में रहते हैं और फिर दूसरा विचार आ रहा था की मेरी पत्नी को लेकर कोई बात तो नहीं हो गई घर पर क्योंकि वह लाला को लेकर पार्क में उसको ताई कमांडो सीखने के लिए ले जाती है लेकिन जब मैं घर पर आया तो ऐसी कोई बात नहीं थी व्यर्थ की कल्पनाएं और विचार मेरा मन कर रहा था तो मैंने देखा की मेरे मन की हर स्थिति झूठी हैं वह अहंकार के डर और असुरक्षा की एक स्थिति है


















