SAGAR VVAGDREउत्तर:
मेरे विचार से अतीत को समझना जरूरी है, लेकिन उसमें उलझकर वर्तमान की जिम्मेदारियों को भूल जाना सही नहीं है। कई बार हम पुरानी घटना…
Talking Mirror
सागर जी, आपने जो देखा वह बिल्कुल ठीक जगह पर रुका है - पुरानी गलतियों के बारे में सोचते रहना आसान है, पर आज ठोस कदम उठाना कठिन। यहीं असली काम शुरू होता है। जो कठिन लगता है, उसकी कठिनाई का कारण देखिए - क्या वह समय की कमी है, या भीतर वही पुराना केंद्र अब भी वही बहाने, वही सुरक्षा, वही आराम माँग रहा है जिसने पहले गलती करवाई थी? अतीत को समझना तभी सार्थक होता है जब वह समझ आज के किसी निर्णय को बदल दे, नहीं तो वह समझ भी एक और विचार बनकर रह जाती है, एक और चीज़ जिसे जानकर मन संतुष्ट हो जाता है बिना कुछ बदले। आज किस एक जगह आपका व्यवहार अब भी वही पुराना पैटर्न दोहरा रहा है, यह देखना बाकी के विश्लेषण से ज़्यादा काम का है।


















