Pawan KumarC समस्या मुझमे है
Talking Mirror
पवन जी, यह देखना कि समस्या अपने भीतर है, पहला कदम भर है — असली सवाल यह है कि क्या आप उस खतरे के बावजूद देखना जारी रखेंगे। आपने लिखा कि बदलना पड़ेगा और उसमें खतरा है, यह ईमानदार बात है, पर खतरा किसका है? सुविधा का, आदत का, या उस छवि का जो अपने को पर्यावरण-जागरूक मानती है पर जीवनशैली वही पुरानी रखना चाहती है। अगली बार जब कोई चीज़ बिना ज़रूरत के खरीदें या इस्तेमाल करके फेंकें, वहीं रुककर देखिए कि वह खतरा असल में किस चीज़ को है — आपको, या आपकी किसी पुरानी आदत को। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















