
Laxmi Bai Yadav
प्रकृति का उपभोग हम बिना सोचे समझे करते हैं क्योंकि हमें समझ नहीं आया! कि किस तरह से या कितना उपभोग करना है! हम अन्हकर के वस में होकर प्रकृति का उपभोग करते हैं!
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प्रकृति का उपभोग हम बिना सोचे समझे करते हैं क्योंकि हमें समझ नहीं आया! कि किस तरह से या कितना उपभोग करना है! हम अन्हकर के वस में होकर प्रकृति का उपभोग करते हैं!
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