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1987 तक बॉक्सिंग नहीं, महिला होना ही जुर्म था || आचार्य प्रशांत
शक्ति
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17 hours ago
Description

विश्व बॉक्सिंग कप 2026 में भारत की ज्योति गुलिया ने गोल्ड मेडल जीता है। लेकिन ये सिर्फ एक मेडल की कहानी नहीं है। 1987 तक महिला बॉक्सिंग को मान्यता ही नहीं थी। 2012 में जब ओलंपिक में महिला बॉक्सिंग शामिल हुई, तब भी बड़ा सवाल यह नहीं था कि मेडल किसे मिलेगा — सवाल यह था कि महिलाएं स्कर्ट पहनेंगी या शॉर्ट्स। आचार्य प्रशांत बता रहे हैं कि यह रिंग जो आज हम देख रहे हैं, इसे यहां तक पहुंचाने में सदियों का संघर्ष लगा है। और आगे की राह क्या हो सकती है, ये भी जानिए इस वीडियो में। प्रसंग: महिला बॉक्सिंग को मान्यता मिलने में इतना समय क्यों लगा? 2012 ओलंपिक में स्कर्ट बनाम शॉर्ट्स का विवाद क्या था? खेल में महिलाओं के संघर्ष का असली इतिहास क्या है? आगे महिला खेलों की संभावना कैसी है? #ज्योतिगुलिया #WorldBoxingCup2026 #गोल्डमेडल #IndianBoxing #WomenInSport #भारतकीबेटी #Boxing2026 #AcharyaPrashant #शक्ति #WomenEmpowerment #IndianAthlete #स्पोर्ट्समेंशिप #GoldForIndia #BoxingChampion #नारीशक्ति ➖➖➖➖➖➖ 🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें: https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00031 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00031 ➖➖➖➖➖➖ वीडियो जानकारी: 21.12.23, नेशनल बॉक्सिंग प्रतियोगिता 2023, ग्रेटर नॉएडा संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~