
मन को पकड़ने के लिए कुछ सार्थक/विधायक चाहिए। हम जो कुछ भी मन को देंगे उसे पकड़ लेगा। हमें कुछ ऐसा चाहिए जो बाकी सब धारणाओं को तो काट पाए और अंत में खुद भी मिट जाए। तो आदिशंकराचार्य जी ने कहा कि "हम असंग हैं"। तो मन को कुछ तो मिल गया पकड़ने को। मन संतुष्ट हुआ। असंग होना ऐसी बात है जो पकड़ में आ ही नहीं सकती। क्योंकि जो असंग है उसके साथ कोई नहीं, उसके बाद दूसरा कोई नहीं, तो फिर उसे पकड़ने वाला भी कौन होगा फिर? इसपर विस्तार से चर्चा की गई है।
आगे समझेंगे, जितनी भी अवस्थाएँ होती हैं, उनके पीछे बैठा है अनंतर स्वभाव। जैसे बादल आ-जा रहे हों, ध्यान तो सारा बादलों पर ही चला जाता है। आसमान पर ध्यान नहीं जाता। पर बादल दिखाई ही इसलिए पड़ते हैं क्योंकि उनके पिछे आकाश है। निरन्तर स्वभाव में कैसे रहा जाए? क्या स्वभाव को ढूंढना है?
आम भाषा में ईश्वर और परमात्मा को हम एक ही समझते हैं। पर ईश्वर और परमात्मा दोनों ही आयामगत रूप से अलग-अलग हैं। ईश्वर हमारे आयाम का है, जिसके सामने हम प्रार्थना करते हैं अपने इक्षाओं की पूर्ति के लिए पर परमात्मा से हमारा सम्बंध आम जीवन में होता नहीं। इस कोर्स के माध्यम से समझेंगे कि परमात्मा और ईश्वर में क्या भेद है और दोनों को अपने जीवन में किस तरह से देखा जाए।
*जीवन में बन्धनों को स्पष्ट देख पाएंँगे
*मन को शांति की तरफ ले जाने कि दिशा मिलेगी
*आत्मा से सम्बंधित भ्रांतियाँ टुटेंगी
आप जिस उत्तर की तलाश कर रहे हैं वह नहीं मिल रहा है? कृपया हमारी सपोर्ट टीम से संपर्क करें।
वीडियो श्रृंखला के सभी वीडियो-सत्र सिर्फ़ इस प्लेटफार्म पर उपलब्ध हैं। (कुछ वीडियो के कुछ हिस्से किन्हीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकते हैं। हालाँकि, इनकी संरचना, परीक्षण और प्रक्रियाओं के साथ पूरा पाठ्यक्रम इस प्लेटफॉर्म के अलावा कहीं और उपलब्ध नहीं है।)
यहाँ उपलब्ध सभी वीडियो श्रृंखला आचार्य जी के पहले से रिकॉर्डेड वीडियो का संकलन है। यह कोई लाइव वीडियो नहीं हैं इसलिए आप इन वीडियो श्रृंखलाओं से कभी भी जुड़ सकते हैं और अपने हिसाब से इनके वीडियो-सत्र देख सकते हैं।
वीडियो श्रृंखला की न्यूनतम सहयोग राशि संस्था के न्यूनतम आर्थिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए रखी गयी है।
संस्था जिस जन-जागरण आन्दोलन के साथ आगे बढ़ रही है, वो मूलतः व्यक्तिगत और सामाजिक सुधार के लिए है। इसलिए व्यापक स्तर पर बदलाव लाने के लिए संस्था को अधिक संसाधनों की आवश्यकता है। आपके द्वारा किया जाने वाला योगदान समाजिक उत्थान के रूप में वापिस आप तक ही पहुँचता है। इसलिए अधिक योगदान कर संस्था को बल दें जिससे वह आपकी और सहायता कर सके।
जब आप किसी वीडियो श्रृंखला में एनरोल करते हैं, तो आप उस श्रृंखला को आजीवन देख सकते हैं।
हाँ, आप वीडियो श्रृंखला का कोई भी वीडियो सत्र कितनी भी बार देख सकते हैं। वीडियो सत्र को बीच में रोकने, पीछे जाने, या आगे बढ़ने की सुविधा भी उपलब्ध है।
यह हमारे लिए बहुत प्रसन्नता की बात है कि इस वीडियो श्रृंखला से आपकी सहायता हुई और अब आप संस्था की मदद करना चाहते हैं। सबसे पहले हम आपसे निवेदन करेंगे कि आप अपना पूरा अनुभव हमारे साथ [email protected] पर साझा करें। ऐसा करने के बाद आप 'शेयर' बटन का उपयोग कर इस वीडियो श्रृंखला के विषय में अपने मित्रों को बता सकते हैं, या संस्था को यहाँ जाकर अनुदान भी कर सकते हैं।