Gifting available for eBook & AudiobookAdd to cart and tap ‘Send as a Gift’
Paperback Details
HindiLanguage
158Print Length
Description
श्रीकृष्ण गीता में आपसे एक बात कह रहे हैं, वो बात तब भी उपयोगी थी, आज भी उपयोगी है, सदा उपयोगी रहेगी, समयातीत बात है।
लेकिन हमें लगने लग जाता है कि उस समय का जो कुछ था, वो भी समयातीत ही होगा। तो उस समय की जो परिस्थितियाँ थीं, हम उन्हें भी दोहरा देना चाहते हैं। अब श्रीकृष्ण तो रथ पर चलते थे, आप रथ पर चलने लग जाओगे सड़क पर? और मुकुट पहनोगे? और धनुष-बाण लेकर चलोगे?
जब अर्जुन उस अर्जुन जैसा नहीं रहा, तो क्या कृष्ण वैसे ही होंगे जैसे उस समय थे?
गीता नहीं बदलेगी। अर्जुन भी बदलेंगे, कृष्ण भी बदलेंगे; कृष्णत्व नहीं बदलेगा।
Index
CH1
कृष्ण को चुनने दो कि कृष्ण का संदेश कौन सुनेगा
CH2
जगते में जागे नहीं सोते नहीं सोए, वही जाने कृष्ण को दूजा न कोय
CH3
तीन मार्ग - ध्यानयोग, कर्मयोग, ज्ञानयोग
CH4
ज्ञानमार्ग, भक्तिमार्ग और कर्ममार्ग – हमारे लिए कौन सा उचित है?
आचार्य प्रशांत के द्वारा धर्म, और कृष्णत्व के मर्म पर दी गई एक अमूल्य भेंट है ये पुस्तक।
श्री कृष्ण को यदि समग्र रूप से समझना हो तो पुस्तक पढ़ें। इसमें बात एक संबंध की भी होगी: जो है मेरे और कृष्ण के बीच का संबंध।
Jagadish Sethy
2mo
मेरे लिए क्यों प्रासंगिक हैं श्रीकृष्ण ?
Title में लिखे सवाल का हल मिलेगा आपको। 🪔
Gaurang Deshpande
2mo
Gaurang
यहाँ आपको उस कृष्ण से अवगत करवाया गया है, जो आपके ही तल पर आकर आपको बड़ी सरल भाषा में समझाते हैं, अद्भुत!
Renuka
2mo
श्रीकृष्ण से जो सचमुच लेना चाहिए, उसकी याद दिलाती है
हम माखन, पीले वस्त्र और श्री कृष्ण की कहानियों में ही फंस गए। यह पुस्तक पढ़ कर पता चला कि कितना कुछ है जो ऊँचा है, जो वो हमें दे रहे हैं।
Om Singh
2mo
कृष्ण नहीं, कृष्णत्व को जानने की यात्रा
यह पुस्तक कृष्ण को जानने से ज़्यादा, कृष्णत्व को समझने की यात्रा है। समय, परिस्थितियाँ और पात्र बदल सकते हैं, लेकिन सत्य नहीं बदलता। श्रीकृष्ण की यही समयातीत प्रासंगिकता इस पुस्तक को विशेष बनाती है।