उपनिषद् महावाक्य (Upanishad Mahavakya)

उपनिषद् महावाक्य (Upanishad Mahavakya)

उपनिषदों का सार
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Hindi Language
Description
उपनिषद् महावाक्य सारे उपनिषदों का सार हैं। ये ऋषियों की ऐसी उद्घोषणा है जो हमें हमारे वास्तविक स्वरूप से परिचित कराते हैं। ये हमें बताते हैं कि हम मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार से परे, जन्म-मरण, सुख-दुःख से विलग सच्चिदानंद स्वरूप हैं।

इन महावाक्यों में अधिकतम तीन पद हैं और ये तीन पदों में ही संपूर्ण वेदांत का सार प्रकट कर देते हैं। सारे ग्रंथ इन महावाक्यों का ही विस्तार रूप हैं।

चूँकि ये महावाक्य अपने में गहनतम अर्थ छुपाए हुए हैं, अतः इनका सामान्य अर्थ नहीं किया जा सकता। इन्हें समझने के लिए एक विशेष ध्यान और सावधानी की ज़रूरत पड़ती है।

प्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत सभी महावाक्यों का गूढ़ व उपयोगी अर्थ बता रहे हैं। आचार्य प्रशांत अर्थों को इस तरह प्रस्तुत कर रहे हैं कि इन्हें आसानी से आत्मसात किया जा सकता है।

यदि इन महावाक्यों को ही स्पष्टता से समझ लिया जाए तो और कुछ जानना शेष नहीं रह जाएगा। उपनिषद् के इन महावाक्यों से परिचित होकर आप अपनी क्षुद्रता को संरक्षित नहीं रख पाएँगे, आपको उत्कृष्टता की ओर जाना ही पड़ेगा।
Index
CH1
अहं ब्रह्मास्मि
CH2
तत्त्वमसि
CH3
प्रज्ञानं ब्रह्म
CH4
अयं आत्मा ब्रह्म
CH5
एकमेवाद्वितीयं ब्रह्म
CH6
सोऽहं
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क्या आपको आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं से लाभ हुआ है? आपके योगदान से ही यह मिशन आगे बढ़ेगा।
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