
झुकेगा नहीं तो रावण बनेगा

ज्ञान (Gyaan)” पढ़ते समय सबसे पहले यही महसूस होता है कि यह किताब “जानकारी” और “सच्चे ज्ञान” के बीच फर्क साफ करने की कोशिश करती है। किताब बार-बार यह दिखाती है कि हम जो कुछ भी जानते हैं—किताबों से, समाज से, अनुभव से—वह जरूरी नहीं कि हमें सच में बदल रहा हो। यह बात काफी relatable है, क्योंकि हम अक्सर बहुत कुछ जानते हैं, लेकिन जीवन में वही गलतियाँ दोहराते रहते हैं। मुझे इसमें यह अच्छा लगा कि यह किताब स...