वेदांत के राम (Vedant Ke Ram)

वेदांत के राम (Vedant Ke Ram)

राम निरंजन न्यारा रे
4.8/5
5 Ratings
Gifting available for eBook & Audiobook Add to cart and tap ‘Send as a Gift’
eBook Details
hindi Language
Description
मुक्तिका उपनिषद् में हनुमान जी श्रीराम से पूछते हैं 'आपका वास्तविक स्वरूप क्या है?' तब श्रीराम उत्तर देते हैं, 'मैं वेदान्त में वास करता हूँ। संतों ने हमें बताया है कि चार राम हैं —
एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घट घट में बैठा।
एक राम का सकल पसारा, एक राम त्रिभुवन से न्यारा॥
ज़्यादातर लोग पहले राम, दो देहधारी राम हैं, उनसे आगे निकल ही नहीं पाते। आचार्य प्रशांत इस पुस्तक के माध्यम से हमें वास्तविक राम से परिचित करवा रहे हैं जो इस संसार से न्यारे हैं।
Index
CH1
जो लोग प्राण प्रतिष्ठा में नहीं पहुँचे, वो दुखी न हों
CH2
लोगन राम खिलौना जाना
Choose Format
Share this book
क्या आपको आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं से लाभ हुआ है? आपके योगदान से ही यह मिशन आगे बढ़ेगा।
Reader Reviews
4.8/5
5 Ratings
5 stars 80%
4 stars 20%
3 stars 0%
2 stars 0%
1 stars 0%