
सम्पूर्ण भजन व भाष्य

राम निरंजन न्यारा रे” एक गहरी आध्यात्मिक किताब है, जो कबीर साहब के भजन के माध्यम से जीवन और सत्य को समझाने का प्रयास करती है। इसे पढ़ते हुए मुझे महसूस हुआ कि हम अक्सर बाहरी दुनिया में उलझे रहते हैं, जबकि असली खोज हमारे भीतर की होनी चाहिए। किताब बहुत सरल भाषा में “अंजन” और “निरंजन” के फर्क को समझाती है। यह बताती है कि जो कुछ हम देखते और अनुभव करते हैं, वह अस्थायी है, जबकि सच्चा सत्य उससे परे है। मु...

"मैं एक apparatus हूँ, मैं एक machine हूँ, मैं एक process हूँ" — अपनेआप को ऐसे देख लेना, ये साक्षीत्व है। "मैं हूँ ही नहीं।" "I am a set of chemical reactions." "I am a sequence of chemical reactions."— ये साक्षीत्व है। "अंजन सकल पसारा रे।" ये जो चारों तरफ़ हो रहा है, ठीक वही मुझमें भी हो रहा है।

राम जी पर कबीर साहब के भजन को लेखक ने बहुत सुन्दर और आसान भाषा में समझाया है। राम का क्या अर्थ है? आज के समय में राम को कैसे पाया जाए? इन सब गहन प्रश्नों का उत्तर आचार्य जी बहुत सुंदर और सरल भाषा में देते हैं। श्री राम को समझने के लिए बहुत अच्छी पुस्तक है। सभी को पढ़ना चाहिए।