
दुर्गासप्तशती ग्रंथ का सार

ये ग्रंथ सार पढ़ते हुए जिस तरह से आचार्य जी ने चित्रण किया है वो सब जैसे सामने घटित हो रहा था। ग्रंथ पुराना है,कथा भी पुरानी है लेकिन उसका महत्व आज भी है क्योंकि वो सब कभी इतिहास में नहीं हुआ था,आज भी वही हो रहा है बस रूप बदल गया है। अगर ये किताब पहले पढ़ी होती तो बस इतिहास की कहानी भर बनके रह जाती लेकिन आचार्य जी के साथ इसका महत्व समझ आया।

दुर्गासप्तशती सार” असल में उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी लगती है जो पूरे ग्रंथ में जाने से पहले उसका सार समझना चाहते हैं। किताब का फोकस सीधे-सीधे कथा बताने पर नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे प्रतीकों और अर्थ को समझाने पर है। यह अच्छी बात है, क्योंकि इससे यह सिर्फ धार्मिक पाठ न रहकर एक समझने वाली चीज़ बन जाती है। हालांकि, क्योंकि यह “सार” है, तो कुछ जगहों पर गहराई थोड़ी सीमित महसूस होती है। अगर कोई बहुत...